Welcome to Prashant Mani Tripathi Kosh

अवैध सामान

दिन के पांच बजे चुके थे। कुछ पुलिस वाले एक लड़के को लथेड़, लथेड़ के पीट रहे थे। लड़का जहां पिट रहा था वो पुलिस चौकी थी। बहुत दौड़-धूप करने के बाद लड़का पुलिस वालों के हाथ लगा था। लवंडा बीच चौराहे पर पिट रहा था। पहले तो कुछ देर तक लड़के ने खड़े होकर मार खाया। लेकिन जब पुलिस वालों ने मारना बंद नहीं किया तो लड़का आप-से-आप सड़क पर लोट गया। अब हुआ ये कि पहले खड़ा था इसलिए पुलिस वाले तमाचे से मार रहे

जबाब मांगा

 

हम जब छोटे से बड़े हुए

तब हमें वो सब याद ही नहीं रहा

ऐसा कैसे हुआ ?

जब कि हम बड़े होकर

सबकी पीड़ा हर लेने की इच्छा रखते थे ।

 

ऐसा भी नहीं है

कि हम सब कुछ भूल गए

पर पता नहीं क्यों

बड़े होने के बाद पता चला

कि वो सब करना इतना आसान नहीं है

जो हम सोचा करते थे

क्या इसी को परिवर्तन कहते हैं ?

 

मर गया सामने वो किसान

 

जो करते थे वादे

सत्ता में आने से पहले

वे ही देखते रहते तमाशा

सत्ता में आने के बाद

मर गया सामने वो किसान

जिसके लिए हो रहा था आंनोदलन खुले आम ।

 

गया नहीं कोई उठकर अपनी जगह से

उसके मरने के भी बाद

लगाते रहते गोहार उसी मंच से

जिस पर चल रहा था किसानों के हक की बात

बदनामी काहें की

 

आरती की शादी उसके पापा ने कुछ दिनों पहले ही तय किया था। एक ही लड़की उनके पास थी, इसलिए उसकी शादी बहुत धूम-धाम से करना चाहते थे। उन्होंने अपने पूरे जीवन में जो कमाया था उसका पूरी तरह से उपयोग अपनी बेटी की शादी में करना चाहते थे। बहुत दिनों के बाद घर में कोई कार्यक्रम हो रहा था। कमल की शादी होने के बाद घर में कोई दूसरी शादी भी नहीं हुई। न तो और भी किसी तरह का कोई कार्यक्रम हुआ।

प्यार की हार

 

पूरे चार साल बाद जाकर अमिता की शादी तय हुई थी। इसलिए अमिता के माता-पिता के खुशी का कोई सीमा नहीं था। पिता जी से ज्यादा अमिता की मम्मी खुश थीं। अमिता पांच बहनें थीं। और सबसे छोटा भाई था। और इसी भाई के चक्कर में अमिता पांच बहनें हो गई थी। ऐसा भारत के बहुत से घरों में हुआ है और हो रहा है और शायद आगे भी होता रहेगा।

ऐसा हुआ था

 

आंखों देखा हाल

 

मदन की बीबी और बच्चें घर पर उसका इंतजार कर रहे थे। रात के नौ बजने वाले हो गए थे। पर मदन का कुछ पता ही नहीं था। बच्चें सो रहे थे। लेकिन घर में खाने के लिए कुछ नहीं था इसलिए मदन की बीबी बच्चों से कहती, “अभी बाऊ सामान लेकर आते ही होंगे।”

वार

 

युद्ध, मार-पीट, लड़ाई-झगड़े, विद्रोह-क्रान्ति ये जो शब्द हैं बहुत भयानक हैं। इंसान इन शब्दों को सुनकर ही डर जाता है, जहाँ तक मैं समझता हूँ ? वैसे इसमें इन शब्दों को कोई दोष नहीं हैं, क्योंकि ये खुद ही नहीं बन गए हैं।

वतन की धरती

 

एक

मत तोड़ो दिल मेरा

 

मत तोड़ो दिल मेरा

वरना एक दिन पश्चताओ गी

तोड़ेगा जब तुम्हारा भी कोई दिल

तब तुम भी यही कहती पाई जाओगी ।

 

याद करोगी तुम उस दिन मुझको

दौड़कर मेरे पास आओगी

ये जो दिन है आज तुम्हारें

नहीं रहेंगे ऐसे ये यूँ ही ।

 

ये समझ तुम लो जानेमन

जब तुम दौड़कर मुझको ढूँढती हुई आओगी

तो बिन पाए तुम मुझे

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